भोपाल में शनिवार -दि.३०-७-१६, राष्ट्रीय स्वयम सेवक संघ और भाजपा वालों की जॉइंट मीटिंग सम्पन्न हुई। मीटिंग में उपस्थित 'संघ वालों' ने अपनी समीक्षा रिपोर्ट में भाजपा सरकार को असफल बताया और वह रिपोर्ट प्रेस को भी रिलीज कर दी। मेरी नजर में इसके लिए वे धन्यवाद के पात्र हैं। हालाँकि संघ की समीक्षा रिपोर्ट में सिंहस्थ भृष्टाचार,व्यापम भृष्टाचार या दिलीप बिल्डकॉन नुमा भृष्टाचार पर एक शब्द नहीं कहा गया,किन्तु फिर भी 'संघ' वालों ने शिवराज सरकार को उसका असफलता का आइना जरूर दिखाया है। समीक्षा रिपोर्ट में साफ़ किया गया है कि ''मध्यप्रदेश सरकार का कोई भी काम जमीन पर नहीं दिख रहा है और जनाधार भी खिसक रहा है ''! इसके उलट शिवराज के पिछलग्गू अधिकारी ,मंत्री एवम पार्टी नेता अखवारों में ,टीवी पर और सोशल मीडिया पर जोर-जोर से काल्पनिक विकास और उपलब्धियों का ढपोरशंख बजाये जा रहे हैं। सवाल है कि संघ और भाजपा के इस 'राग छ्त्तीसी'आकलन में उन लोगों के क्या विचार हैं जो 'संघ' परिवार के अंध भक्त हैं ?जो लोग सोशल- इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भृष्ट भाजपा सरकारों के पक्ष में खड़े हैं ,वे इस समीक्षा विमर्श के मुद्दे पर 'संघ' और भाजपा में से किसी एक को ही चुन सकते हैं ! यदि वे 'संघ 'समर्थक हैं तो संघ की समीक्षा का समर्थन करें। और भाजपा की असफलता पर हल्ला बोलें। यदि वे भाजपा समर्थक हैं तो 'संघ' की समीक्षा' को रद्दी की टोकरी में डालने का ऐलान करें। और संघ के अंध भक्त होने का पाखण्ड बन्द करें !
शनिवार, 30 जुलाई 2016
भोपाल में शनिवार -दि.३०-७-१६, राष्ट्रीय स्वयम सेवक संघ और भाजपा वालों की जॉइंट मीटिंग सम्पन्न हुई। मीटिंग में उपस्थित 'संघ वालों' ने अपनी समीक्षा रिपोर्ट में भाजपा सरकार को असफल बताया और वह रिपोर्ट प्रेस को भी रिलीज कर दी। मेरी नजर में इसके लिए वे धन्यवाद के पात्र हैं। हालाँकि संघ की समीक्षा रिपोर्ट में सिंहस्थ भृष्टाचार,व्यापम भृष्टाचार या दिलीप बिल्डकॉन नुमा भृष्टाचार पर एक शब्द नहीं कहा गया,किन्तु फिर भी 'संघ' वालों ने शिवराज सरकार को उसका असफलता का आइना जरूर दिखाया है। समीक्षा रिपोर्ट में साफ़ किया गया है कि ''मध्यप्रदेश सरकार का कोई भी काम जमीन पर नहीं दिख रहा है और जनाधार भी खिसक रहा है ''! इसके उलट शिवराज के पिछलग्गू अधिकारी ,मंत्री एवम पार्टी नेता अखवारों में ,टीवी पर और सोशल मीडिया पर जोर-जोर से काल्पनिक विकास और उपलब्धियों का ढपोरशंख बजाये जा रहे हैं। सवाल है कि संघ और भाजपा के इस 'राग छ्त्तीसी'आकलन में उन लोगों के क्या विचार हैं जो 'संघ' परिवार के अंध भक्त हैं ?जो लोग सोशल- इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भृष्ट भाजपा सरकारों के पक्ष में खड़े हैं ,वे इस समीक्षा विमर्श के मुद्दे पर 'संघ' और भाजपा में से किसी एक को ही चुन सकते हैं ! यदि वे 'संघ 'समर्थक हैं तो संघ की समीक्षा का समर्थन करें। और भाजपा की असफलता पर हल्ला बोलें। यदि वे भाजपा समर्थक हैं तो 'संघ' की समीक्षा' को रद्दी की टोकरी में डालने का ऐलान करें। और संघ के अंध भक्त होने का पाखण्ड बन्द करें !
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