बुधवार, 20 जुलाई 2016

पंजाब में ''हंसना मना है ''!


 पंजाब में  शिरोमणि अकालीदल -भाजपा गठबंधन की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। बादल परिवार की निजी 'शहंशाही तड़क -भड़क 'ने  पूरे पंजाब को कर्ज के गर्त में धकेल दिया है। युवाओं में  बेतहाशा बढ़ती जाती नशे की लत और वेरोजगारी ने वर्तमान पंजाबको  'उड़ता पंजाब' बनाकर रख दिया है। उधर कांग्रेस की आपसी खींच -तान और सिरफुटौव्वल के कारण अमरिंदर सिंह  का मार्ग भी कंटकाकीर्ण  ही है। कांग्रेसी नेतत्व तो पहले से ही अपनी दागदार छवि से आक्रान्त और पथरीला है। लेकिन कहावत है कि 'उम्मीद पर दुनिया कायम है ' पंजाब के लोगों को यह खुशख़बरी ही है कि राज्यसभा सीट को लतियाकर 'सिध्दू पाजी'  पंजाब  विधान सभा के आगामी चुनावों में  सक्रिय  भूमिका अदा करेंगे।  यदि  वे खुदा -न -खास्ता विधान सभा में पहुंच जाते है या मंत्री पद पा जाते हैं तो पंजाब  विधान सभा और पंजाब का मौजूदा ग़मगीन  चेहरा फिर से खिल उठेगा।उधर कॉमेडियन से नेता बने भगवंत मान और इधर सिध्दू पाजी जब आगामी चुनावों में अपने -हास्य-परिहास का भरपूर प्रदर्शन करेंगे तो पंजाब की राजनीति में फिर से 'बल्ले-बल्ले 'की धूम होगी । अभी तो हालात  इतने बुरे हैं कि पंजाब में ''हंसना मना है ''! एसजीपीसी द्वारा 'संता -बंता 'चुटकुलों पर प्रतिबन्ध की मांग- सुप्रीम कोर्ट द्वारा मान लेने से और अंदर-अंदर अलगवावाद-आतंकवाद की सुलगती आग ने न  केवल पंजाब  को बल्कि  पूरे भारत को ही ग़मों के महासागर में धकेल दिया है। श्रीराम तिवारी   

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