मंगलवार, 10 मई 2016

हिंदुत्व वादी भारत के असल नारे-Dr S.N.Subbarav,,,[ Nayee Duniya se sabhaar]



आधुनिक युवाओं को डॉ एस एन सुब्बाराव के बारे में शायद ही  कुछ मालूम हो ,किन्तु सामाजिक कार्यकरताओं और अध्येता- प्रबुद्ध जनों को उनके बारे में बहुत कुछ मालूम है। डॉ सुब्बाराव वरिष्ठ गांधीवादी फिलॉस्फर और ख्यातनाम सामाजिक कार्यकर्ता हैं। प्रसिद्धि से दूर रहकर उन्होंने विगत शताब्दी के सातवें-आठवें दशक में चंबल के बीहड़ों को और बुंदेलखंड  के घने जंगलों को डाकुओं से मुक्त कराया था। तब  दुर्दांत डाकुओं के आतंक से आम जनता बहुत पीड़ित थी।डॉ सुब्बाराव ने उन खूँखार डाकुओं  का आत्म समर्पण करवाया। उन्होंने मध्यप्रदेश ,छ्ग यूपी और राजस्थान को डाकू समस्या से मुक्ति  दिलाई। वे महात्मा गाँधी की पत्नी कस्तूरबा गाँधी से संबंधित कार्यक्रम में शिरकत करने इंदौर आये । वे गांधी रिसर्च फाउंडेशन से भी वास्ता रखते हैं। इस अवसर पर इंदौर में पत्रकारों के सवालों का जबाब देते हुए डॉ सुब्बाराव ने अपने कुछ महत्वपूर्ण विचार रखे। धर्म-अध्यात्म और साइंस को लेकर उन्होंने अपनी  पृथक  परिभाषा प्रस्तुत की। वेशक जो लोग किसी खास विचारधारा को अंतिम सत्य मानते हैं ,वे  डॉ एस एन सुब्बाराव से शायद ही सहमत होंगे !

विज्ञान और साइंस की तुलना पर और भौतिकवादी बनाम अध्यात्मवादी दर्शन की तुलना पर डॉ सुब्बाराव ने फरमाया ''साइंस  और भौतिकवादी दर्शन की अपनी सीमाएँ हैं ,किन्तु अध्यात्म-दर्शन का दायरा बहुत  व्यापक है। दुनिया के शीर्ष वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन स्वयं कहा करते थे कि विज्ञान के जरिये बीमार मनुष्य को स्वस्थ तो किया जा सकता है ,किन्तु हम अभी तक कोई ऐंसा इन्जेकशन  नहीं बना सके जो  किसी बेईमान आदमी को ईमानदार बना दे ! इसके लिए तो हमें अध्यात्म के तहत  ही अनुसन्धान करना होगा ''

'भारत माता की जय ' और देशभक्ति बनाम देशद्रोह  के विमर्श को उन्होंने मीडिया प्रायोजित बताया। उन्होंने कहा ''साइंस ने दुनिया की भौगोलिक दूरी तो घटा दी किन्तु दिलों की दूरियाँ कम करने मे उसकी भूमिका क्या  है? '' ८८ साल के सीनियर गांधीवादी फिलॉस्फर एस एन  सुब्बाराव इस उम्र में  भी अपने तमाम काम खुद ही करते हैं।  अतयन्त प्रतिभावान -ऊर्जावान सुब्बाराव आगे कहते हैं ''वंदे  मातरम ,भारत माता की जय और अन्य  नारे तो गुलामी के दौर में कांग्रेस के अहिंसात्मक  हथियार हुआ करते थे। जबकि शहीद  भगतसिंह,  चन्द्रशेखर आजाद,सुखदेव ,राजगुरु और हिन्दुस्तान सोसलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी का नारा 'इंकलाब जिंदाबाद हुआ करता था। '' उन्होंने हिंदुत्ववादियों से  व्यंगात्मक लहजे में सवाल किया  कि वे  यदि वास्तव में हिन्दू हैं तो असल हिन्दू वादी  नारे क्यों नहीं लगाते ? जब किसी पत्रकार ने उनसे पूँछा  कि  हिंदुत्व वादी भारत के असल नारे क्या होने चाहिए ? डॉ सुब्बाराव ने कहा '' विश्व का कल्याण हो !जियो और जीने दो ! वसुधैव कुटुम्बकम !सत्य मेवजयते !
  श्रीराम तिवारी !

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें