''धर्मपत्नी -बीबी -घरवाली इत्यादि संज्ञाओं से संबोधित की जाने वाली हस्ती , किसी भी नेक और आदर्श पुरुष की अर्धांगनी ,उसके लिए मंदिर के प्रसाद की तरह हुआ करती है। भगवान् का प्रसाद कैसा भी हो ,उसे आप चाहें या न चाहें, लेकिन 'शृद्धा,सबूरी और मजबूरी 'के साथ स्वीकार करना ही पड़ता है '',,,,,!
गुरुवार, 13 अक्टूबर 2016
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