गुरुवार, 20 अक्टूबर 2016



मनुष्य की आत्मिक प्रवृत्ति और मानसिक सोच उसके विचारों में परिलक्षित होती है। यदि किसी मनुष्य की सोच में तार्किकता ,वैज्ञानिकता ,प्रगतिशीलता , क्रांतिकारी- प्रतिबद्धता का सकारात्मक समावेश है तो निसंदेह उसके विचार भी भव्य और सर्वजनहिताय ही  होंगे !जबकि क्रांतिकारी विचारधारा विहीन साधारण मनुष्य निहित स्वार्थी होकर पशुवत आचरण के लिए अभिसप्त हुआ करता है। ऐसा मनुष्य साहित्य ,कला ,संगीत और जन संघर्षों से कोसों दूर रहता है।     

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें