इन दिनों भारत में एक जुमला ज्यादा ही चलन में है। 'ऐसा पहली बार हुआ '! इस जुमले को जुमलेबाज ही ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। यह प्राकृतिक न्याय का सिद्धांत है कि राजनीति में यदि साम्प्रदयिक और कूढ़मगज लोगों को यदि सत्ता का स्वाद चखने को मिल जाए तो वे एक घातक मानसिक बीमारी से ग्रस्त हो जाते हैं। उन्हें जिस विषय का ज्ञान ही नहीं होता वे उस विषय में भी बढ़चढ़कर अपनी ऊलजलूल प्रतिक्रियाएँ देनेके लिए उतावले रहते हैं.!भारत में जबसे मोदी सरकार सत्ता में आई है तबसे सोशल मीडियामें और राजनैतिक गलियारों में एक वाक्य बहुश्रुत है कि '' ऐसा पहली बार हुआ है ''! जैसेकि वे कह रहे हैं कि आपरेशन सर्जिकल स्ट्राइक पहली बार हुआ है, हमारी फ़ौज ने पहली बार पाकिस्तान में घुसकर उसे मारा है। या कि कोई प्रधानमंत्री पहली बार लखनऊ के दशहरा समारोह में शामिल हुआ है ,या पहली बार किसी प्रधान मंत्री ने यूएनओ में हिंदी में भाषण दिया । इस तरह की शाब्दिक कलाबाजी केवल आत्मप्रशंसा में ही संभवहै। वे भूल जातेहैं कि आदिमकाल से सब कुछ पहली बार से ही शुरूं हुआ है !
सामान्य बुद्धि का व्यक्ति भी जानता है कि हरेक की जिंदगी में जो कुछ होता है वह पहली बार अवश्य होता है। जब कोई स्त्री माँ बनती है तो उसके जीवन में दूसरी बार यह हो न हो लेकिन 'पहली बार' यह अवश्य होता है। जब कोई व्यक्ति बीमार पड़ता है ,जब कोई व्यक्ति धोखा खाता है ,जब किसी को कोई सफलता मिलती है ,जब कोई हारता है और जब कोई जीत हासिल होती है तो यह सिलसिला पहली बार से ही आगे बढ़ता है। 'भारत ने आजादी हासिल की' यह भी तो पहली बार ही हुआ है ,वरना गुलामी तो बार-बार इस मुल्क को डसती रही है। भारत टेस्ट क्रिकेट में इंदौर में पहली बार जीता ,या फलाँ खिलाड़ी ने ओलम्पिक में अमुक खेल में पहली बार गोल्ड मेडल हासिल किया। यह जुमला हर इंसान ,हर समाज और हर राष्ट्र में पहली बार से ही शुरूं होता है ,यही कुदरत का नियम है। हरेक इंसान पहली बार ही मरता है लेकिन ऐंसा कहा नहीं जाता कि 'फलाँ पहली बार मरा या अमुक पहली बार मरा ! श्रीराम तिवारी !

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