कायर की वजह से
किसी पर मुसीबतें नहीं आती ,
दंगे नहीं होते किसी भी जगह पर ,
कुछ तबाह नहीं होता ,
कायर की वजह से !
तलवार नहीं निकालता कायर,
और उसकी धार परखने के लिए ,
पेड़ों पर तलवार नहीं चलाता कायर !
क्योंकि उसे किसी पर वार नहीं करना है !
कायर कभी किसी को डरा कर नहीं रखता ,
कायर तो खुद डरता है अपने समय के अँधेरे से।
इसीलिये गीत निकलने लगते हैं आपने आप भीरु हृदय से।
कायर को प्रकृति हमेशा गले लगाती है ,
जैसे कोई माँ अपने डरे हुए बच्चे को ले लेती है अपने आँचल में।
प्रकृति तो कायर के गले में डालती है जिंदगी का हार क्योंकि ,
मुसीबत से बचने के लिए कायर हमेशा अपनी हद में रहता है।
इसलिए वह अपने घर का कोना -कोना साफ़ रखता है और -
आपने कभी किसी कायर को खेल के मैदान में नहीं देखा होगा !
कायर कभी नफरत भरे राष्ट्रप्रेम का जोश लोगों में नहीं जगाता !
कायर कभी राजनीती में नही होता ,
किसी आदर्श विचारधारा को नहीं अपनाता ,
और वह किसी नेता का चमचा भी नहीं होता !
कायर किसी नेता के स्वागत को तैयार नहीं रहता ,
उनके समर्थ में नारे भी नहीं लगाता ,
पैर भी नहीं छूता!
कायर किसी का कुछ नहीं छीनता ,
वह उन्हें भी नहीं रोकता जो उसका सब कुछ छीन लेते हैं !
कायर नहीं करता किसी असहाय अबला से बलात्कार ,
और किसी के शरीर को चोरी -छिपे देखता भी नहीं कायर !
कायर नहीं करता कभी किसी की निर्मम हत्या ,
वेशक ,कायर सोचता रहता है खुदकुशी के बारे में ,
और कायर ऐंसा कर भी लेता है कभी-कभी !
कायर की वजह से ही बची है दुनिया अब तक ,
ओर बचा है 'मनुष्य',
वरना ये 'बहादुर' तो अब तक मिटा देते सारी दुनिया ,
और मनुष्यता भी !
[रचनाकार :- पेरुमल मुरुगन -तमिल कवि ]

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