बुधवार, 7 सितंबर 2016

कायर का गीत -पेरुमल मुरुगन की कविता


कायर की वजह से

किसी पर मुसीबतें नहीं आती ,

दंगे नहीं होते किसी भी जगह पर ,

कुछ तबाह नहीं होता ,

कायर की वजह से !

तलवार नहीं निकालता  कायर,

और उसकी धार परखने के लिए ,

पेड़ों पर तलवार नहीं चलाता कायर !

क्योंकि उसे किसी पर वार नहीं करना है !

कायर कभी किसी को डरा कर नहीं रखता ,

कायर तो खुद डरता है अपने समय के अँधेरे से।

इसीलिये गीत निकलने लगते हैं आपने आप भीरु हृदय से।

कायर को  प्रकृति हमेशा  गले लगाती है ,

 जैसे कोई माँ अपने डरे हुए बच्चे को ले लेती है अपने आँचल में।

प्रकृति तो कायर के गले में डालती है जिंदगी का हार क्योंकि ,

मुसीबत से बचने के लिए कायर हमेशा अपनी हद में रहता है।

इसलिए वह अपने घर का कोना -कोना साफ़ रखता है और -

आपने कभी किसी कायर को खेल के मैदान में नहीं देखा होगा !

कायर कभी नफरत भरे राष्ट्रप्रेम का जोश लोगों में नहीं जगाता !

कायर कभी राजनीती में नही होता ,

किसी आदर्श विचारधारा को नहीं अपनाता ,

और वह किसी नेता का चमचा भी नहीं होता !

कायर किसी नेता के स्वागत  को तैयार नहीं रहता ,

उनके समर्थ में नारे भी नहीं लगाता ,

पैर  भी नहीं छूता!

कायर किसी का कुछ नहीं छीनता ,

वह उन्हें भी नहीं रोकता जो उसका सब कुछ छीन लेते हैं !

कायर नहीं करता  किसी असहाय अबला से बलात्कार ,

और किसी के शरीर को चोरी -छिपे देखता भी नहीं कायर !

कायर नहीं करता कभी किसी की निर्मम हत्या ,

वेशक ,कायर सोचता रहता है खुदकुशी के बारे में ,

और कायर ऐंसा कर भी लेता है  कभी-कभी !

कायर की वजह से ही बची है दुनिया अब तक ,

ओर बचा है 'मनुष्य',

वरना ये 'बहादुर' तो अब तक मिटा देते सारी दुनिया ,

और मनुष्यता भी !

[रचनाकार :-  पेरुमल मुरुगन -तमिल कवि ]






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