रविवार, 20 नवंबर 2016


 इंदौर से हर सोमवार को निकलने वाला 'सकारात्मक सोमवार' का आज २१ नवम्बर [सोमवार] का अंक सामने है। इसका प्रथम पृष्ठ पूरा पढ़ने का माद्दा मुझमे नहीं है। जिसमे पूरा पेज पढ़ने की हिम्मत हो वह बड़ा जिगरवाला है  ! पुखरायाँ के समीप हुई भीषण रेल दुर्घटना की मार्मिक रिपोर्ट में उसका  सचित्र वर्णन, १०० से ऊपर दर्दनाक मौतें, सैकड़ों मरणासन्न - घायल , दर्दनाक चीख पुकार इसमें सब कुछ नकारात्मक और मर्मान्तक है ! हे नरेंद्र !हे प्रभु  ! इस देश पर रहम करो !

 इधर भारत के सत्ताधारी नेता जुमलेबाजी में ,जनता को परेशान करने या भरमाने की जद्दोजहद में जुटे हैं ,उधर   तुर्की का राष्ट्रपति एर्दोगान पाकिस्तान आया और पाकिस्तानी संसद में भाषण देकर चला गया। इस भाषण में एर्दोगान ने कश्मीर के सन्दर्भ में पाकिस्तान की कारिस्तानी का समर्थन किया है और भारत के हितों पर खुल्लम -खुल्ला चोट की है ,भारत के नकली 'राष्ट्रवादी' नेता ,उनके 'चारण - भाट और लोभी लालची स्वामी -बाबा लोग केवल विपक्ष को गरियाने में  जुटे हैं !

शनिवार, 19 नवंबर 2016


नोटबंदी अथवा सरकार के किसी अन्य नीतिगत फैसले से यदि जनता को या बैंक वालों को कोई तकलीफ होती है ,यदि लोग  मरने लगते हैं तो इसमें सरकार का कोई असुर नहीं। धार्मिक व्याख्या के अनुसार सभी प्राणी अपने -अपने किये का फल भोग रहे हैं। गोस्वामी तुलसीदास जी भी अपने रामचरितमानस में यही  कह गए हैं:-

''कोउ न काउ सुख दुखकर दाता। निजकृत कर्म भोग सब भ्राता।।

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मौद्रिक सर्जिकल स्ट्राइक याने नोटबंदी के इस 'महायज्ञ' में जो लोग स्वाहा हो रहे हैं, वे जब तक कतार में खड़े थे तब तक देशभक्त थे [राम माधव और राजनाथसिंह के अनुसार] जब ये देशभक्त कतार में खड़े -खड़े मर गए तो सत्ताधारी लोग इन दिवंगतों को शहीद  मानने से इनकार कर रहे है। नेता और मंत्री इन मौतों पर व्यंगात्मक टिपण्णी करे रहे हैं कि जनता को कोई परेशानी नहीं ! क्या यही लोकतंत्र है ? क्या  यही इंसानियत है ?

शुक्रवार, 18 नवंबर 2016

सरकार ने होम वर्क नहीं किया !


केंद्र सरकार की 'नोटबंदी' योजना से आरबीआई के पास अरबों रूपये पुराने नोटों की शक्ल में जमा हो चुके हैं !इस योजना के लागु होने से सरकार के खजाने में जमा हुई करेंसी में कितना कालाधन जमा हुआ यह तो सरकार ही जाने ,किन्तु इस आपाधापी में जो सैकड़ों जाने गईं हैं, उनमें  कालेधन वाला 'देशद्रोही' शायद एकभी नहीं था।   मोदी जी को मालूम हो कि उनकी इस नोटबंदी से एक नया आपराधिक समाज पैदा हो गया है। कमीशनखोर नए दलाल-भृष्ट बैंक कर्मचारी -अधिकारी और 'अदृष्यजगत' के बेईमानों ने आपण कालाधन सुरक्षित कर लिया है।   ईमानदार और बेकसूर लोग सरकार कीआधी अधूरी तैयारी और 'कुनीति' के कारण लाइन में लगे-लगे मरे हैं या मर रहे हैं। क्या उन्हें 'शहीद' का  दर्जा नहीं दिया जाना चाहिए ? क्या उन्हें मरणोपरान्त वही सम्मान नहीं मिलना चाहिए जो देश के लिए जान देनेवालों को दिया जाता है?

सरकार और उसके चाटुकारों का ढपोरशंखी रवैया न जाने कितनी और जाने लेगा ? सरकार ने अपनी नोटबंदी पर इतने तदर्थ पैबन्द याने थेगड़े लगाये कि आज कोलकाता उच्च न्यायालय को भी कहना पड़ा कि '' सरकार ने होम वर्क नहीं किया'' । केवल ढींगे हाँकने या कोरी लाठी पीटने से साँप नहीं मरते। अभी तक एक भी कालेधन वाला मगरमच्छ तो क्या छटाक भर की मछली भी नहीं पकड़ सके हैं । बड़े आश्चर्य की बात है कि नोटबंदी बनाम 'मौद्रिक सर्जिकल स्ट्राइक' पर सरकार और उसके 'चमचों' को बिखरे हुए विपक्ष का भौंथरा विरोध भी सहन नहीं हो रहा है। यदि इस नोटबंदी  का मकसद कश्मीरी पत्थरबाजों को नसीहत देना था तो पूरे देश को दाँव पर क्यों  लगाया ?  यदि इस मौद्रिक सर्जिकल स्ट्राइक का मकसद ,पाकिस्तान में छपने वाली नकली करेंसी को रोकना है तो यह बात तो सबको मालूम है कि पाकिस्तान की आईएसआई नकली भारतीय मुद्रा छापकर भारत में खपाती है , यह खबर पूरी दुनिया को वर्षों से मालूम है , क्या यह बात शरीफ के घर चाय पीते वक्त मोदी जी भूल गए थे ?

गुरुवार, 17 नवंबर 2016

आप बेक़सूर लोगों की जान क्यों ले रहे हैं?


अभी -अभी श्रीमतीजी को अस्पताल ले गया ,वहाँ अधिकांस लोग इलाज के लिए रुपयों की मारामारी और पुराने नोटों को बदलने की परेशानी बयां  कर रहे थे।  मैंने भी अपना अनुभव बताया कि 'नोटबंदी' से मुझे तो कोई खास परेशानी नहीं हुई। लोगों ने आश्चर्य से मेरी और देखा और पूँछा  वो कैसे ? मैंने कहा कि मेरे पास काला और गोरा दोनों ही प्रकार का धन नहीं है। रही बात बैंक में जमा मामूली बचत खाते से निकासी की तो सीनियर सिटीजन्स   की हैसियत से जहाँ भी जाता हूँ ,एटीएम की लाइन वाले अपने आप रास्ता छोड़ देते हैं। यह सुनकर मेरे परिचित डॉक्टर ने सवाल किया कि फिर आप अपने ब्लॉग पर और फेसबुक पर मोदी जी की 'मौद्रिक सर्जिकल स्ट्राइक' का विरोध क्यों करते हैं ?

मैंने उन्हें बताया कि यदि पड़ोस के मकान में आग लगी हो तो आप को चैन से सोने की मूर्खता नहीं करनी चाहिए। क्योंकि वह मुसीबत की आग किसी को नहीं छोड़ती। रतलाम में जवान बेटा अपने बाप को लाइन में खड़ा कर आधार कार्ड लेंने घर गया, कार्ड खोजने और नहीं मिल पाने के कारण घबराहट से उसका हार्ट फ़ैल हो गया , पोस्ट मार्टम में डॉक्टरों ने बताया कि मृतक बंदा दो दिनों से भूंखा था। क्योंकि उसका गाँव रतलाम से बहुत दूर है और इधर बैंक में लाइन इतनी लम्बी कि उसका नम्बर आते -आते नोट खत्म हो जाते हैं । बेटे की मौत की खबर सुनकर बाप अभी तक सदमें में है।  यह एक घटना है ,इसी तरह भारत में अब तक लगभग ४४ लोग  इस नोटबंदी की भेंट चढ़ चुके हैं ! वेशक  इस नोटबंदी से मुझे कोई परेशानी नहीं है ! जबकि नक्सली और आतंकी बहुत परेशान हैं। हजार-हजार के नोटों की माला धारण करने वाली नेत्रियां और नेता भी परेशान हैं, किन्तु उन्हें छकाने के लिए आप बेक़सूर लोगों की जान क्यों ले रहे हैं ?  इसके अलावा ओएनजीसी को एक लाख करोड़ का चूना लगाने वाले अम्बानी ,बैंकों को चूना लगाने वाले विजय माल्या ,अरबों का हवाला -घोटाला करने वाले मित्रवर अडानी की काली सम्पदा को सफ़ेद कर चुकने  के बाद यह 'मौद्रिक सर्जिकल स्ट्राइक' केवल प्रहसन बनकर रह गयी है। इसलिए इसके समर्थन या विरोध का बबाल खड़ा करने के बजाय जनता की परेशानी पर तुरन्त  ध्यान दिया जाना चाहिए ! श्रीराम तिवारी ! 

सोमवार, 14 नवंबर 2016

भरतखण्डे उर्फ़ जम्बूदीपे उर्फ़ आर्यावर्त उर्फ़ हिन्दुस्तान उर्फ़ इंडिया उर्फ़ भारतवर्ष में 'कालेधन' की वजह से  समुचित विकास नहीं हो पा रहा है।देश के दुश्मनों द्वारा नकली मुद्रा [कालाधन]छापकर भारत में आतंकवाद - अलगाववाद को बढ़ावा दिया जारहा हैऔर तमाम किस्मके आर्थिक संकट केलिए यह 'कालाधन'ही जिम्मेदार है।भारत के सत्तारूढ़ नेतत्व का दृढ़ विश्वास है कि हजार-पांच सौ की 'नोटबंदी' से सब कुछ ठीक हो जाएगा।  
'वेदांत दर्शन' के कार्यकरण -सिद्धांतानुसार  कालाधन 'कारण' है और नोटबंदी' कार्य है। और यह नोटबन्दी रुपी कार्य ही भारत में वर्तमान 'मुद्रा संकट' रुपी कार्य का कारण बन गया है। इस 'मौद्रिक सर्जिकल स्ट्राइक' की कृपा से देश के निम्न मध्यम वर्ग का दिमाग चकरघिन्नी हो रहा है। देश में  करोड़ों ईमानदार लोग होंगे जिन्हें अभी तक 'नये नोटों ' के दर्शन भी नहीं हुए हैं ,किन्तु आज की ताजा खबर है कि तेलांगना में कुछ 'बदमाशों' को २००० रू० के नए 'नकली नोट' चलाते पकड़ा गया है। समझ में नहीं आ रहा है कि अच्छे दिन आये हैं या कि देश में अघोषित आपातकाल चल रहा है !

गुरुवार, 10 नवंबर 2016


  प्रेसिडेंट पद पर डोनाल्ड ट्रम्प की जीत से  न केवल अमेरिका में बल्कि पूरी दुनिया में अचरज का माहौल  है। जिन लोगों ने हिलेरी की जीत  की भविष्यवाणी की थी और जिन्होंने  ट्रम्प को  'मसखरा' या   'लम्पट' कहा था वे अभी कोमा में हैं। वास्तविकता यह है कि साम्राज्यवादी मुल्क अमेरिका  पूरा का पूरा 'भाँग का कुआँ' ही है ,वहाँ कोई भी प्रेजिडेंट बने, लेकिन सत्ता केवल 'आवारा पूँजी' के निर्देशानुसार ही चलेगी ! अब रही बात तथाकथित सभ्य महिला हिलेरी क्लिंटन की दर्दनाक हार की ,तो पांच साल पहले इन्ही ट्रम्प महाशय ने कहा था ''अमेरिकी महा बेवकूफ होते हैं ''! श्रीराम तिवारी !

 इंदौर ,दिनांक १० नवम्बर -२०१६ ,दैनिक भास्कर की खबर है कि '' विगत आधी रात के बाद से सुबह ४ बजे तक  इंदौर में ५० हजार रुपया प्रति १० ग्राम के भाव से १०० किलो सोना खरीदा गया ! '' यह बताने की जरूरत नहीं कि खरीददार कौन थे ? इनमें से अधिकांस वे  लोग थे जो  कालेधन के मालिक हैं और दिन में अपने आपको 'राष्ट्रवादी' या  सेक्यूरिस्ट 'कहते हैं।  यदि अकेला इंदौर सराफा ही  मात्र तीन घण्टे में ५०० ००००००० /- करोड़ के  कालेधन को सफ़ेद में बदल सकता है,तो देश के अन्य शहरों -और कसवों का कुल योग कितना होगा ?  भारत के धर्मनिरपेक्ष ,ईमानदार और  लाइन में लगकर ,तकलीफ उठाकर २-४ हजार रूपये के लिए पसीना बहाने वाले नर-नारी  सवाल कर रहे हैं कि  प्रधानमंत्री मोदी जी  कहीं आपका यह मौद्रिक सर्जिकल स्ट्राइक भी संदेहास्पद तो नहीं है ? और इसकी भी क्या  गारन्टी है कि  पाकिस्तान का एएसआई और आतंकी निजाम  आइंदा नकली नोट छापकर भारत भेजना बंद कर देगा ? जब व्हाइट कॉलर लोग नयी तकनीक ईजाद कर सकते हैं तो आतंकी  ऐंसा क्यों  नहीं कर सकते  ? श्रीराम तिवारी !
  

मंगलवार, 8 नवंबर 2016

मनुष्य की सर्वश्रेष्ठ कल्पना का नाम 'ईश्वर 'है !

सैकड़ों साल पहले जब नीत्से ने कहा था कि ''ईश्वर मर चुका है '' तब  फेस बुक ,ट्विटर और वॉट्सअप नहीं थे , वरना साइंस पढ़े -लिखे और साइंस को ही आजीविका बना चुके धर्मांध सपोले उस 'नीत्से' को भी डसे बिना नहीं छोड़ते। आज चाहे  आईएसआईएस के खूंखार जेहादी हों ,चाहे पाकिस्तान प्रशिक्षित कश्मीरी आतंकी हों ,चाहे जैश ए मुहम्मद और सिमी के समर्थक हों या जिन्होंने दाभोलकर,पानसरे ,कलबुर्गी और अखलाख को मार डाला ऐंसे स्वयम्भू कट्ररपंथी हिंदुत्ववादी हों ये सबके सब 'नीत्से' की स्थापना के जीवन्त प्रमाण हैं।


मानव सभ्यता के इतिहास में बेहतरीन मनुष्यों द्वारा आहूत उच्चतर मानवीय मूल्यों को धारण करने की कला का नाम 'धर्म' है !मनुष्य की सर्वश्रेष्ठ कल्पना का नाम 'ईश्वर' है। भारतीय वांग्मय के 'धर्म' शब्द का अर्थ 'मर्यादा को धारण करना' माना गया है। जबकि दुनिया की अन्य भाषाओं में 'मर्यादा को धारण करना'याने 'धर्म' शब्द का कोई वैकल्पिक शब्द ही नहीं है। जिस तरह मजहब ,रिलिजन  इत्यादि शब्दों का वास्तविक अर्थ या अनुवाद 'धर्म' नहीं है। उसी तरह 'परमात्मा या ईश्वर जैसे शब्दों का अभिप्राय भी अल्लाह  या गॉड कदापि नहीं है। कुरान के अनुसार 'अल्लाह' महान है और मुहम्मद साहब उसके रसूल हैं तथा अल्लाह ही कयामत के रोज सभी मृतकों के उनकी नेकी-बदी के अनुसार फैसले करता   है।इसी तरह  बाईबिल का 'गॉड ' भी अलग किस्म की थ्योरी के अनुसार पूरी दुनिया का निर्माण महज ६ दिनों में करता है और अपने 'पुत्र' ईसा को शक्ति प्रदान करता है की धरती के लोगों का उद्धार करे। जबकि गीता ,वेद और उपनिषद का कहना है की 'आत्मा ही परमात्मा है' ''तत स्वयं योग संसिद्धि कालेन आत्मनि विन्दति''या ''पूर्णमदः पूर्णमिदम ,पूर्णात पूर्णम उदचचते। पूर्णस्य पूर्णमादाय ,पूर्णम एवाविष्य्ते '' याने  प्रत्येक जीवात्मा का अंतिम लक्ष्य अपनी पूर्णता को प्राप्त करना है ,अर्थात परमात्मा में समाहित हो जाना है। इस उच्चतर दर्शन को श्रेष्ठतम मानवीय सामाजिक मूल्यों से संगति बिठाकर जो जीवन पद्धति बनाई गयी उसे 'सनातन धर्म' कहते हैं। कालांतर में स्वार्थी राजाओं ,लोभी बनियों और पाखण्डी पुरोहितों ने  अपने निजी स्वार्थ के लिए धर्मको शोषण-उत्पीड़न का साधन बना डाला। उन्होंने पवित इस धर्म को जात -पांत ,ऊंच -नीच घृणा ,अहंकार और अनीति का भयानक कॉकटेल बना डाला जिसे सभी लोग अब 'अधर्म' कहते हैं। इस अधर्म में जब अंधराष्ट्रवाद और धर्मान्धता का बोलवाला हो  गया तब   कार्ल मार्क्स ने उसे अफीम कहा था । धर्म-मजहब की यह अफीम इन दिनों  पूरी दुनिया में इफरात से मुफ्त में मिल रही है।  श्रीराम तिवारी !