भरतखण्डे उर्फ़ जम्बूदीपे उर्फ़ आर्यावर्त उर्फ़ हिन्दुस्तान उर्फ़ इंडिया उर्फ़ भारतवर्ष में 'कालेधन' की वजह से समुचित विकास नहीं हो पा रहा है।देश के दुश्मनों द्वारा नकली मुद्रा [कालाधन]छापकर भारत में आतंकवाद - अलगाववाद को बढ़ावा दिया जारहा हैऔर तमाम किस्मके आर्थिक संकट केलिए यह 'कालाधन'ही जिम्मेदार है।भारत के सत्तारूढ़ नेतत्व का दृढ़ विश्वास है कि हजार-पांच सौ की 'नोटबंदी' से सब कुछ ठीक हो जाएगा।
'वेदांत दर्शन' के कार्यकरण -सिद्धांतानुसार कालाधन 'कारण' है और नोटबंदी' कार्य है। और यह नोटबन्दी रुपी कार्य ही भारत में वर्तमान 'मुद्रा संकट' रुपी कार्य का कारण बन गया है। इस 'मौद्रिक सर्जिकल स्ट्राइक' की कृपा से देश के निम्न मध्यम वर्ग का दिमाग चकरघिन्नी हो रहा है। देश में करोड़ों ईमानदार लोग होंगे जिन्हें अभी तक 'नये नोटों ' के दर्शन भी नहीं हुए हैं ,किन्तु आज की ताजा खबर है कि तेलांगना में कुछ 'बदमाशों' को २००० रू० के नए 'नकली नोट' चलाते पकड़ा गया है। समझ में नहीं आ रहा है कि अच्छे दिन आये हैं या कि देश में अघोषित आपातकाल चल रहा है !
'वेदांत दर्शन' के कार्यकरण -सिद्धांतानुसार कालाधन 'कारण' है और नोटबंदी' कार्य है। और यह नोटबन्दी रुपी कार्य ही भारत में वर्तमान 'मुद्रा संकट' रुपी कार्य का कारण बन गया है। इस 'मौद्रिक सर्जिकल स्ट्राइक' की कृपा से देश के निम्न मध्यम वर्ग का दिमाग चकरघिन्नी हो रहा है। देश में करोड़ों ईमानदार लोग होंगे जिन्हें अभी तक 'नये नोटों ' के दर्शन भी नहीं हुए हैं ,किन्तु आज की ताजा खबर है कि तेलांगना में कुछ 'बदमाशों' को २००० रू० के नए 'नकली नोट' चलाते पकड़ा गया है। समझ में नहीं आ रहा है कि अच्छे दिन आये हैं या कि देश में अघोषित आपातकाल चल रहा है !

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