अभी -अभी श्रीमतीजी को अस्पताल ले गया ,वहाँ अधिकांस लोग इलाज के लिए रुपयों की मारामारी और पुराने नोटों को बदलने की परेशानी बयां कर रहे थे। मैंने भी अपना अनुभव बताया कि 'नोटबंदी' से मुझे तो कोई खास परेशानी नहीं हुई। लोगों ने आश्चर्य से मेरी और देखा और पूँछा वो कैसे ? मैंने कहा कि मेरे पास काला और गोरा दोनों ही प्रकार का धन नहीं है। रही बात बैंक में जमा मामूली बचत खाते से निकासी की तो सीनियर सिटीजन्स की हैसियत से जहाँ भी जाता हूँ ,एटीएम की लाइन वाले अपने आप रास्ता छोड़ देते हैं। यह सुनकर मेरे परिचित डॉक्टर ने सवाल किया कि फिर आप अपने ब्लॉग पर और फेसबुक पर मोदी जी की 'मौद्रिक सर्जिकल स्ट्राइक' का विरोध क्यों करते हैं ?
मैंने उन्हें बताया कि यदि पड़ोस के मकान में आग लगी हो तो आप को चैन से सोने की मूर्खता नहीं करनी चाहिए। क्योंकि वह मुसीबत की आग किसी को नहीं छोड़ती। रतलाम में जवान बेटा अपने बाप को लाइन में खड़ा कर आधार कार्ड लेंने घर गया, कार्ड खोजने और नहीं मिल पाने के कारण घबराहट से उसका हार्ट फ़ैल हो गया , पोस्ट मार्टम में डॉक्टरों ने बताया कि मृतक बंदा दो दिनों से भूंखा था। क्योंकि उसका गाँव रतलाम से बहुत दूर है और इधर बैंक में लाइन इतनी लम्बी कि उसका नम्बर आते -आते नोट खत्म हो जाते हैं । बेटे की मौत की खबर सुनकर बाप अभी तक सदमें में है। यह एक घटना है ,इसी तरह भारत में अब तक लगभग ४४ लोग इस नोटबंदी की भेंट चढ़ चुके हैं ! वेशक इस नोटबंदी से मुझे कोई परेशानी नहीं है ! जबकि नक्सली और आतंकी बहुत परेशान हैं। हजार-हजार के नोटों की माला धारण करने वाली नेत्रियां और नेता भी परेशान हैं, किन्तु उन्हें छकाने के लिए आप बेक़सूर लोगों की जान क्यों ले रहे हैं ? इसके अलावा ओएनजीसी को एक लाख करोड़ का चूना लगाने वाले अम्बानी ,बैंकों को चूना लगाने वाले विजय माल्या ,अरबों का हवाला -घोटाला करने वाले मित्रवर अडानी की काली सम्पदा को सफ़ेद कर चुकने के बाद यह 'मौद्रिक सर्जिकल स्ट्राइक' केवल प्रहसन बनकर रह गयी है। इसलिए इसके समर्थन या विरोध का बबाल खड़ा करने के बजाय जनता की परेशानी पर तुरन्त ध्यान दिया जाना चाहिए ! श्रीराम तिवारी !

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