''भारत बन्द'' तो विगत ८ नवम्बर से ही जारी है। आज २८ नवम्बर को तो केवल 'जबरा मारे और रोने न दे '' वाली कहावत ही चरितार्थ हो रही है। कालेधन वाले हरामखोर बदमाश -तक्षक नाग अपने बिलों में छुपकर काले को सफ़ेद कर चुके हैं। चूँकि उनकी बीसों घी में हैं इसलिए भारत बन्द विरोध कर रहे हैं। नोटबंदी का समर्थन करने यदि उन घरों में जाएंगे जहाँ नोटबंदी के कारण मौतें हुईं हैं, तो शायद उनकी आत्मा में इंसानियत जाग उठेगी।
जिनके पास संपत्ति के रूप में केवल अपना खून-पसीना है ,जो मेहनतकश नर-नारी गरीबी में भी अपना ईमान नहीं छोड़ते ,जो किसी भी तरह के अन्याय को सहन नहीं करते , जो सच्चे देशभक्त हैं ,जो शासकों की सनक को देश के लिए खतरा मानते हैं, जिन्हें लगता है कि नोटबंदी के कारण कालाधन सरकार के हाथ नहीं आया, किन्तु ईमानदार जनता अवश्य परेशान हो रही है, ऐंसे जावाँज देशभक्त लोग आज 'विमुद्रीकरण 'की खामियों का और उसकेलिए जिम्मेदार नेता का पुरजोर विरोध कर रहे हैं ! इस संघर्षमें शामिल सभी साथियोंको -नमन !श्रीराम !
जिनके पास संपत्ति के रूप में केवल अपना खून-पसीना है ,जो मेहनतकश नर-नारी गरीबी में भी अपना ईमान नहीं छोड़ते ,जो किसी भी तरह के अन्याय को सहन नहीं करते , जो सच्चे देशभक्त हैं ,जो शासकों की सनक को देश के लिए खतरा मानते हैं, जिन्हें लगता है कि नोटबंदी के कारण कालाधन सरकार के हाथ नहीं आया, किन्तु ईमानदार जनता अवश्य परेशान हो रही है, ऐंसे जावाँज देशभक्त लोग आज 'विमुद्रीकरण 'की खामियों का और उसकेलिए जिम्मेदार नेता का पुरजोर विरोध कर रहे हैं ! इस संघर्षमें शामिल सभी साथियोंको -नमन !श्रीराम !

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