गुरुवार, 24 नवंबर 2016

यदि आप दूसरों के सतत सहयोगी बने रहेंगे तो !


यदि आप  वरिष्ठजनों ,सुह्रदयजनों और अभिभावकों के प्रति कृतज्ञता भाव रखते हैं तो आप को नैसर्गिक रूप से तत्काल ख़ुशी प्राप्त होगी। ज्यों ही आप नकारात्मक विचार तरंगों को प्रतिबंधित करते हैं ,अपना मन अनावश्यक मुद्दोंसे हटाकर उसे प्रकृति दर्शन ,आत्मदर्शन की ओर ले जाते हैं ,अथवा किसी के हितका विचार धारण करते हैं, खुशी की लहर तुरन्त दौड़ी चली आती है। छोटे -छोटे बच्चों की किलकारियों ,सितारों से सजी चांदनी रात और किसी मनोअनुकूल स्वजन से सहज वार्तालाप निश्चय ही सतत ऊर्जावान बनाते हैं। यदि आप किसी भी कार्य को करने से पहले यह देख लें कि वह अनैतिक तो नहीं है ,वह किसी अन्य के अहित का कारण तो नहीं बनेगा और उसे करने से किसी का कुछ लाभ है या नहीं ,तभी आप उस कार्य को करें। अन्यथा 'उससे बेहतर तो 'अकर्म 'की स्थिति ही उचित है। इस तरह जब आप निर्भीक होकर ख़ुशीमन से कोई कार्य करते हैं तो आपको गुणात्मक रूप से अनन्य ख़ुशी मिलती है। यदि आप खुशमिजाज रहेंगे ,दूसरों के सतत सहयोगी बने रहेंगे तो स्वाभाविक रूप से सर्वप्रिय बने रहेंगे। इस तरह आप अपने मन को  स्थिर करने में भी सफल हो सकते हैं,जो विपश्यना ,ध्यान और योग इत्यादि में मददगार सावित होगा। खुशमिजाज व्यक्ति अपने व्यक्तिगत जीवनमें तो सफल होता ही है,किन्तु उसका सार्वजनिक जीवन भी भव्य और खुशहाल हो जाता है। वह दुःख ,क्लेश और अभाव में प्रशांतचित्त होकर चुनौतियों का सामना करता है। ऐंसा व्यक्ति भले ही अनीश्वरवादी ही क्यों न हो वह भौतिक,आध्यात्मिक और सर्व - सामाजिक  जीवन भी अक्षुण बनाता हैं । श्रीराम तिवारी !

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